Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
6.133.4
श्र॒द्धाया॑ दुहि॒ता तप॒सोऽधि॑ जा॒ता स्वसा॒ ऋषी॑णां भूत॒कृतां॑ ब॒भूव॑ । सा नो॑ मेखले म॒तिमा धे॑हि मे॒धामथो॑ नो धेहि॒ तप॑ इन्द्रि॒यं च॑ ॥ (४)
शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 6.133.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
श्रद्धा की पुत्री सृष्टि के आदि में ब्रह्म के तप से उत्पन्न हुई. प्राणियों को जन्म देने वाले मरीचि आदि ऋषियों की जो यह मेखला है, वह इसी प्रकार उत्पन्न हुई है. हे मेखला! तू हमें क्रांतदर्शिनी बुद्धि प्रदान कर तथा हमें मेधा दे. इस के अतिरिक्त तू मुझे ताप तथा वीर्य प्रदान कर. (४)
EN English Translation
Shraddha's daughter was born from the tenacity of Brahman in the beginning of creation. This is the belt of sages like Marichi, who gave birth to creatures, has been born in this way. O melon! Give us revolutionary wisdom and give us wisdom. In addition to this, you give me heat and semen. (4)