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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 17 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 17 • मन्त्र 2

6.17.2

Mantra ID: 6.17.2

यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धारे॒मान्वन॒स्पती॑न् । ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.17.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह विशाल पृथ्वी जिस प्रकार वृक्षों को धारण करती है, उसी प्रकार तेरा गर्भ भी प्रसव के समय जन्म लेने के हेतु स्थित रहे. (२)

EN English Translation

Just as this vast earth holds trees, so your womb should also be located to be born at the time of delivery. (2)

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