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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 18 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 18 • मन्त्र 1

6.18.1

Mantra ID: 6.18.1

ई॒र्ष्याया॒ ध्राजिं॑ प्रथ॒मां प्र॑थ॒मस्या॑ उ॒ताप॑राम् । अ॒ग्निं हृ॑द॒य्यं शोकं॒ तं ते॒ निर्वा॑पयामसि ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.18.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ईर्ष्या करने वाले पुरुष! तेरी ईरष्यापूर्ण मति यह है कि इस स्त्री को कोई देख न ले. इस मति को शांत करते हुए हम तेरे हृदय विदारक शोक एवं क्रोध को शांत करते हैं. (१)

EN English Translation

O jealous man! Your jealous mind is that no one should see this woman. By calming this mind, we calm your heart-rending grief and anger. (1)

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