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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 69

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6

Kanda 6 • Sukta 69

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Mantra 6.69.1

गि॒राव॑र॒गरा॑टेषु॒ हिर॑ण्ये॒ गोषु॒ यद्यशः॑ । सुरा॑यां सि॒च्यमा॑नायां की॒लाले॒ मधु॒ तन्मयि॑ ॥ (१)

हि हिन्दी अनुवाद

हिमालय पर्वत में जो यश है, रथ में बैठ कर चलने वाले राजाओं में, स्वर्ण में और गायों में जो यश है, वह मुझे प्राप्त हो. पात्रों में ढाली जाती हुई मदिरा में और अन्न में जो मधुर रस रूपी यश है, वह मुझे प्राप्त हो. (१)

EN English Translation

May I have the fame in the Himalayan mountains, the fame in the kings who sit in the chariot, in gold and in the cows. May I get the sweet juice-like fame in the wine and food molded in the characters. (1)

Mantra 6.69.2

अश्वि॑ना सार॒घेण॑ मा॒ मधु॑नाङ्क्तं शुभस्पती । यथा॒ भर्ग॑स्वतीं॒ वाच॑मा॒वदा॑नि॒ जनाँ॒ अनु॑ ॥ (२)

हि हिन्दी अनुवाद

हे सुंदर सूर्या के पति अश्चिनीकुमारो! मुझे मधुमव्खियों द्वारा एकत्र किए गए मधु से सींचो, जिस से मैं मनुष्यों को लक्ष्य कर के, मधुर वाणी बोलूं, (२)

EN English Translation

O beautiful Surya's husband Ashchinikumaro! Water me with honey collected by bees, so that I may speak sweet voices, aiming at men, (2)

Mantra 6.69.3

मयि॒ वर्चो॒ अथो॒ यशोऽथो॑ य॒ज्ञस्य॒ यत्पयः॑ । तन्मयि॑ प्र॒जाप॑तिर्दि॒वि द्यामि॑व दृंहतु ॥ (३)

हि हिन्दी अनुवाद

प्रजापति जिस प्रकार अंतरिक्ष में ज्योतिमंडल को दृढ़ करते हैं, उसी प्रकार मुझ यजमान में तेज, यश और यज्ञ का फल धारण करें. (३)

EN English Translation

Just as Prajapati strengthens the Jyotimandal in space, so should I wear the fruits of glory, fame and sacrifice in the host. (3)

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