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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 8 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 8 • मन्त्र 1

6.8.1

Mantra ID: 6.8.1

यथा॑ वृ॒क्षं लिबु॑जा सम॒न्तं प॑रिषस्व॒जे । ए॒वा परि॑ ष्वजस्व॒ मां यथा॒ मां का॒मिन्यसो॒ यथा॒ मन्नाप॑गा॒ असः॑ ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.8.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पत्नी! जिस प्रकार लता चारों ओर से वृक्ष को लपेटती है, उसी प्रकार तू मेरा आलिंगन कर. जिस प्रकार तू मेरी कामना करती हुई मेरे समीप से कहीं न जाए, उसी प्रकार मैं तुझे अपने वश में करता हूं. (१)

EN English Translation

O wife! Just as the creeper wraps the tree from all sides, so embrace me. Just as you do not go anywhere near me wishing for me, so I subdue you. (1)

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