Popular:
अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 84 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 84 • मन्त्र 3

6.84.3

Mantra ID: 6.84.3

ए॒वो ष्वस्मन्नि॑रृतेऽने॒हा त्वम॑य॒स्मया॒न्वि चृ॑ता बन्धपा॒शान् । य॒मो मह्यं॒ पुन॒रित्त्वां द॑दाति॒ तस्मै॑ य॒माय॒ नमो॑ अस्तु मृ॒त्यवे॑ ॥ (३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 6.84.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पाप देवता निर्त्ति! तुम हमें बाधा न पहुंचाती हुई अत्यंत दृढ़ बंधन वाले रस्सी के फंदों को हम से दूर करो. ये फंदे रोगात्मक हैं. हे रोगी! यमराज तुम्हें मेरे लिए देते हैं. मृत्यु के देवता उस यम को नमस्कार है. (३)

EN English Translation

O sin god! You should remove from us the rope traps with very strong bonds, not obstructing us. These traps are pathological. O patient! Yamraj gives you for me. Salutations to that Yama, the god of death. (3)

卐 HinduText AI