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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 85 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 85 • मन्त्र 2

6.85.2

Mantra ID: 6.85.2

इन्द्र॑स्य॒ वच॑सा व॒यं मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्य च । दे॒वानां॒ सर्वे॑षां वा॒चा यक्ष्मं॑ ते वारयामहे ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.85.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे रोगी पुरुष! तेरे हाथ में वरण वृक्ष से बनी हुई मणि बांधने वाले हम सब इंद्र, मित्र और वरुण की आज्ञा से यक्ष्मा रोग का निवारण करते हैं. हम सभी देवों की आज्ञा से तेरे यक्ष्मा रोग को तेरे शरीर से निकालते हैं. (२)

EN English Translation

O patient man! All of us, who tie a gem made of varan tree in your hand, remove tuberculosis disease by the command of Indra, friend and Varuna. We remove your tuberculosis from your body by the command of all the gods. (2)

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