Popular:
अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 18 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 18 • मन्त्र 3

7.18.3

Mantra ID: 7.18.3

धा॒ता विश्वा॒ वार्या॑ दधातु प्र॒जाका॑माय दा॒शुषे॑ दुरो॒णे । तस्मै॑ दे॒वा अ॒मृतं॒ सं व्य॑यन्तु॒ विश्वे॑ दे॒वा अदि॑तिः स॒जोषाः॑ ॥ (३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 7.18.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

धाता देव वरण करने योग्य समस्त फलों को धारण करें. वे फल प्राप्ति की इच्छा करने वाले यजमान के हेतु हों. उस यजमान के लिए इंद्र आदि अमृत प्रदान करें. वे सभी देव एवं देवमाता अदिति परस्पर मिल कर प्रयत्नशील हों. (३)

EN English Translation

Wear all the fruits that are eligible for selection. They should be for the host who wants to get the fruit. Provide nectar like Indra etc. for that host. All those Gods and Goddess Aditi are trying together. (3)

卐 HinduText AI