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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 23 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 23 • मन्त्र 2

7.23.2

Mantra ID: 7.23.2

ब्र॒ध्नः स॒मीची॑रु॒षसः॒ समै॑रयन् । अ॑रे॒पसः॒ सचे॑तसः॒ स्वस॑रे मन्यु॒मत्त॑माश्चि॒ते गोः ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.23.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पाप रहित, समान ज्ञान वाले एवं दिन के समय अतिशय दीप्तिशाली सूर्य हमें पूजा आदि कर्मो में प्रेरित करें. (२)

EN English Translation

May the sun, without sin, with equal knowledge and very bright during the day, inspire us in worship etc. (2)

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