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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 30 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 30 • मन्त्र 1

7.30.1

Mantra ID: 7.30.1

अग्ना॑विष्णू॒ महि॒ तद्वां॑ महि॒त्वं पा॒थो घृ॒तस्य॒ गुह्य॑स्य॒ नाम॑ । दमे॑दमे स॒प्त रत्ना॒ दधा॑नौ॒ प्रति॑ वां जि॒ह्वा घृ॒तमा च॑रण्यात् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.30.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि और विष्णु! तुम दोनों कहे जाते हुए माहात्म्यपूर्ण, महान गोपनीय, और टपकने वाले घृत को पियो. अग्नि और विष्णु प्रत्येक यज्ञशाला में रत्न धारण करते हैं. तुम दोनों की जिह्वा हवन में डाले गए घृत को सामने आ कर प्राप्त करे. (१)

EN English Translation

O Agni and Vishnu! Drink the great, great secret, and dripping ghrit called both of you. Agni and Vishnu wear gems in every yagyashala. May the tongue of both of you come out and get the ghrit put in the havan. (1)

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