Popular:
अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 43 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 43 • मन्त्र 2

7.43.2

Mantra ID: 7.43.2

सोमा॑रुद्रा यु॒वमे॒तान्य॒स्मद्विश्वा॑ त॒नूषु॑ भेष॒जानि॑ धत्तम् । अव॑ स्यतं मु॒ञ्चतं॒ यन्नो॒ अस॑त्त॒नूषु॑ ब॒द्धं कृ॒तमेनो॑ अ॒स्मत् ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 7.43.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम एवं रुद्र देव! तुम दोनों हमारे शरीरों में रोगों को निकालने वाली जड़ीबूटियों को स्थापित करो. हमारे शरीरों में स्थित हमारे द्वारा किया हुआ जो पाप है, उसे भी हम से अलग करो और नष्ट कर दो. (२)

EN English Translation

O Soma and Rudra Dev! Both of you install herbs that remove diseases in our bodies. Separate and destroy the sin committed by us in our bodies. (2)

卐 HinduText AI