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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 50 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 50 • मन्त्र 1

7.50.1

Mantra ID: 7.50.1

रा॒काम॒हं सु॒हवा॑ सुष्टु॒ती हु॑वे शृ॒णोतु॑ नः सु॒भगा॒ बोध॑तु॒ त्मना॑ । सीव्य॒त्वपः॑ सू॒च्याच्छि॑द्यमानया॒ ददा॑तु वी॒रं श॒तदा॑यमु॒क्थ्य॑म् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.50.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं शोभन आह्वान वाली, पूर्ण चंद्र से सुशोभित एवं शोभन स्तुति वाली पूर्णिमा का आह्वान करता हूं. यह शोभन ज्ञान वाली पूर्णिमा मेरा आह्वान सुने तथा प्रजनन के लक्षण को सी दे. ऐसा वह न टूटने वाली नाड़ी रूपी सूई से सिए. ऐसा कर के पूर्णिमा हमें विक्रांत पुत्र एवं बहुत सा धन प्रदान करे. (१)

EN English Translation

I call for shobhan invocation, full moon beautified and shobhan praise full moon. May this full moon of wisdom listen to my call and signs of reproduction. It was like this with an inkling pulse needle. By doing this, Purnima gives us Vikrant's son and a lot of money. (1)

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