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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 55 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 55 • मन्त्र 4

7.55.4

Mantra ID: 7.55.4

मेमं प्रा॒णो हा॑सी॒न्मो अ॑पा॒नोव॒हाय॒ परा॑ गात् । स॑प्त॒र्षिभ्य॑ एनं॒ परि॑ ददामि॒ ते ए॑नं स्व॒स्ति ज॒रसे॑ वहन्तु ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.55.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्राण वायु इस आयु चाहने वाले पुरुष का त्याग न करे तथा अपान वायु भी इसे छोड़ कर न जाए. मैं इस पुरुष को रक्षा के हेतु सप्त ऋषियों के लिए सौंप रहा हूं. वे सात ऋषि अर्थात्‌ सात प्राण इसे वृद्धावस्था तक ले जाएं. (४)

EN English Translation

Prana Vayu should not give up this age-seeking man and apana air should not leave it. I am handing over this man to the Saptrishis for protection. May those seven sages i.e. seven pranas take it to old age. (4)

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