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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 55 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 55 • मन्त्र 6

7.55.6

Mantra ID: 7.55.6

आ ते॑ प्रा॒णं सु॑वामसि॒ परा॒ यक्ष्मं॑ सुवामि ते । आयु॑र्नो वि॒श्वतो॑ दधद॒यम॒ग्निर्वरे॑ण्यः ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.55.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे आयु चाहने वाले पुरुष! हम तेरे प्राण को वापस बुलाते हैं. हम तेरी आयु के प्रतिबंधक यक्ष्मा रोग को पीछे हटने के लिए प्रेरित करते हैं. वे वरेण्य एवं हवन किए जाते हुए अग्नि देव हमारे इस यजमान को सभी प्रकार से सौ वर्ष की आयु प्रदान करें. (६)

EN English Translation

O age-loving man! We call back your life. We inspire the restrictive tuberculosis of your age to retreat. May agni dev give this host a hundred years of age in all ways while performing varenya and havan. (6)

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