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8.1.3
इ॒ह तेऽसु॑रि॒ह प्रा॒ण इ॒हायु॑रि॒ह ते॒ मनः॑ । उत्त्वा॒ निरृ॑त्याः॒ पाशे॑भ्यो॒ दैव्या॑ व॒चा भ॑रामसि ॥ (३)
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अथर्ववेद मन्त्र 8.1.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे आयु की कामना करने वाले पुरुष! तेरी प्राण वायु एवं चक्षु आदि इंद्रियां तेरे शरीर में निवास करें. तेरी आयु एवं मन भी तेरे इसी शरीर में रहें. हम निर्ति नामक पाप देवता के बंधनों से अपने मंत्रों द्वारा तेरा उद्धार करते हैं. (३)
EN English Translation
O men wishing for age! May your life, air and eyes reside in your body. May your life and mind also remain in your body. We save you through our mantras from the bonds of the sin god named Nirti. (3)