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अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 2 • Mantra 14

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 2 • मन्त्र 14

8.2.14

Mantra ID: 8.2.14

शि॒वे ते॑ स्तां॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॑संता॒पे अ॑भि॒श्रियौ॑ । शं ते॒ सूर्य॒ आ त॑पतु॒ शं वातो॑ वातु ते हृ॒दे । शि॒वा अ॒भि क्ष॑रन्तु॒ त्वापो॑ दि॒व्याः पय॑स्वतीः ॥ (१४)

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अथर्ववेद मन्त्र 8.2.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कुमार! तेरे घर से निकलने के समय द्यावा पृथ्वी मंगल करने वाली हों, संताप न पहुंचाएं तथा तुझे धन प्रदान करें. सूर्य तेरे लिए सुखकारक तपें तथा वायु तेरे मन के अनुकूल बन कर एवं सुखकारी हो कर चले. दिव्य जल तेरे लिए अनेक प्रकार के स्वादों से युक्त एवं कल्याणकारी हो कर बरसें. (१४)

EN English Translation

O Kumar! At the time of leaving your house, the earth is going to do mars, do not cause anger and give you money. Let the sun be pleasant for you and the air becomes favorable to your mind and becomes happy. May divine water rain for you with many types of flavors and welfare. (14)

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