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अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 2 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 2 • मन्त्र 5

8.2.5

Mantra ID: 8.2.5

अ॒यं जी॑वतु॒ मा मृ॑ते॒मं समी॑रयामसि । कृ॒णोम्य॑स्मै भेष॒जं मृत्यो॒ मा पुरु॑षं वधीः ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 8.2.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह प्राणहीन पुरुष जीवित रहे. यह मरण को प्राप्त न हो. हम इसे चेष्टा करने के लिए प्रेरित करते हैं. हम इस मरने वाले पुरुष की चिकित्सा करते हैं. हे मृत्यु! तू इस का वध मत कर. (५)

EN English Translation

This lifeless man survived. It should not be attained by death. We motivate you to try it. We treat this dying man. O death! Don't kill him. (5)

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