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अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 3 • Mantra 12

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 3 • मन्त्र 12

8.3.12

Mantra ID: 8.3.12

यद॑ग्ने अ॒द्य मि॑थु॒ना शपा॑तो॒ यद्वा॒चस्तृ॒ष्टं ज॒नय॑न्त रे॒भाः । म॒न्योर्मन॑सः शर॒व्या॒ जाय॑ते॒ या तया॑ विध्य॒ हृद॑ये यातु॒धाना॑न् ॥ (१२)

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अथर्ववेद मन्त्र 8.3.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि देव! जिस राक्षस के कारण स्त्री और पुरुष आक्रोश से भरे हुए हैं तथा यज्ञ के श्रोता कटुवाणी से मंत्रों का उच्चारण कर रहे हैं, उस राक्षस पर अपने ज्वाला युक्त मन का प्रहार करो. (१२)

EN English Translation

O God of Agni! Attack the demon due to which women and men are full of anger and the listeners of the yajna are chanting mantras with katuwani, attack that demon with your flame. (12)

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