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अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 5 • Mantra 12

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 5 • मन्त्र 12

8.5.12

Mantra ID: 8.5.12

स इद्व्या॒घ्रो भ॑व॒त्यथो॑ सिं॒हो अथो॒ वृषा॑ । अथो॑ सपत्न॒कर्श॑नो॒ यो बिभ॑र्ती॒मं म॒णिम् ॥ (१२)

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अथर्ववेद मन्त्र 8.5.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो पुरुष तिलक वृक्ष से निर्मित मणि को बांधता है, वह बाघ और सिंह के समान दूसरों को पराजित करने वाला होता है. वह गायों में सांड़ के समान स्वच्छंद घूमने वाला होता है एवं शत्रु का विनाश करता है. (१२)

EN English Translation

The man who ties the gem made of tilak tree is the one who defeats others like a tiger and a lion. He is free to roam like a bull in cows and destroys the enemy. (12)

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