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अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 5 • Mantra 21

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 5 • मन्त्र 21

8.5.21

Mantra ID: 8.5.21

अ॒स्मिन्निन्द्रो॒ नि द॑धातु नृ॒म्णमि॒मं दे॑वासो अभि॒संवि॑शध्वम् । दी॑र्घायु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदा॒यायु॑ष्माञ्ज॒रद॑ष्टि॒र्यथास॑त् ॥ (२१)

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अथर्ववेद मन्त्र 8.5.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र उस मणि में हमारा चाहा हुआ सुख स्थापित करें. हे देवो! अधिक आयु प्राप्त करने के लिए तुम भी इस मणि के चारों ओर स्थित रहो. यह प्रार्थना सौ वर्ष की एवं वृद्धावस्था पर्यंत आयु प्राप्त करने के लिए है. (२१)

EN English Translation

May Indra establish our desired happiness in that gem. O God! To get older you also stay located around this gem. This prayer is to attain the age of 100 years and till old age. (21)

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