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अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 7 • Mantra 17

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 7 • मन्त्र 17

8.7.17

Mantra ID: 8.7.17

या रोह॑न्त्याङ्गिर॒सीः पर्व॑तेषु स॒मेषु॑ च । ता नः॒ पय॑स्वतीः शि॒वा ओष॑धीः सन्तु॒ शं हृ॒दे ॥ (१७)

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अथर्ववेद मन्त्र 8.7.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अंगिरा ऋषि द्वारा बताई गई जो जड़ीबूटियां ऊंचे पर्वतों पर एवं समतल मैदानों में उत्पन्न होती हैं, वे दूध के समान सार वाली जड़ीबूटियां हमारे लिए कल्याणकारिणी हों एवं हमारे हृदयों को शांति प्रदान करें. (१७)

EN English Translation

The herbs mentioned by Angira Rishi, which are produced on high mountains and flat plains, should be welfare for us and give peace to our hearts. (17)

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