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अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 7 • Mantra 25

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 7 • मन्त्र 25

8.7.25

Mantra ID: 8.7.25

याव॑तीना॒मोष॑धीनां॒ गावः॑ प्रा॒श्नन्त्य॒घ्न्या याव॑तीनामजा॒वयः॑ । ताव॑ती॒स्तुभ्य॒मोष॑धीः॒ शर्म॒ यच्छ॒न्त्वाभृ॑ताः ॥ (२५)

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अथर्ववेद मन्त्र 8.7.25 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे रोगी पुरुष! हिंसा के अयोग्य गाएं जितनी जड़ीबूटियों को खाती हैं और बकरियां या भेड़ें जिन जड़ीबूटियों को चरती हैं, मेरे द्वारा लाई गई वे सभी जड़ीबूटियां तेरा कल्याण करें. (२५)

EN English Translation

O patient man! May all the herbs that goats or sheep graze, all the herbs brought by me, which are eaten by cows unworthy of violence. (25)

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