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अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 9 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 9 • मन्त्र 11

8.9.11

Mantra ID: 8.9.11

इ॒यमे॒व सा या प्र॑थ॒मा व्यौच्छ॑दा॒स्वित॑रासु चरति॒ प्रवि॑ष्टा । म॒हान्तो॑ अस्यां महि॒मानो॑ अ॒न्तर्व॒धूर्जि॑गाय नव॒गज्जनि॑त्री ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 8.9.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वह विराट्‌ ही है, जो सब से पहले उषा के रूप में उत्पन्न हुआ था तथा उसी ने सृष्टि का अंधकार मिटाया था. विराट्‌ से संबंधित उषा ही समस्त उषाओं में प्रवेश कर के प्रकाश करती है. सोम, सूर्य, अग्नि आदि सभी देव विराट्‌ के अधीन हैं. विराट्‌ रूप उषा ही सूर्य की पत्नी है. (११)

EN English Translation

She is the one who was born as Usha first of all and she wiped out the darkness of creation. Usha related to Virat enters all the ushas and lights it. All the gods like Soma, Surya, Agni etc. are under Virat. Virat Roop Usha is the wife of Surya. (11)

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