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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 1 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 1 • मन्त्र 10

9.1.10

Mantra ID: 9.1.10

स्त॑नयि॒त्नुस्ते॒ वाक्प्र॑जापते॒ वृषा॒ शुष्मं॑ क्षिपसि॒ भूम्या॒मधि॑ । अ॒ग्नेर्वाता॑न्मधुक॒शा हि ज॒ज्ञे म॒रुता॑मु॒ग्रा न॒प्तिः ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.1.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वर्षा करने वाले प्रजापति-पति! तुम्हारी वाणी बिजली के समान भड़कने वाली है. तुम सारी पृथ्वी पर जल को सींचते हो. मरुतों की उग्र पुत्री मधुकशा का जन्म अग्नि और वायु से हुआ है. (१०)

EN English Translation

O Prajapati-husband who showers! Your speech is as flashy as electricity. You water water all over the earth. Madhukasha, the fierce daughter of the Maruts, was born with agni and air. (10)

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