Popular:
अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 1 • Mantra 24

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 1 • मन्त्र 24

9.1.24

Mantra ID: 9.1.24

यद्वी॒ध्रे स्त॒नय॑ति प्र॒जाप॑तिरे॒व तत्प्र॒जाभ्यः॑ प्रा॒दुर्भ॑वति । तस्मा॑त्प्राचीनोपवी॒तस्ति॑ष्ठे॒ प्रजा॑प॒तेऽनु॑ मा बुध्य॒स्वेति॑ । अन्वे॑नं प्र॒जा अनु॑ प्र॒जाप॑तिर्बुध्यते॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (२४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 9.1.24 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

आकाश में जो मेघ गर्जन होता है, वह प्रजापति है, वह प्रजाओं के लिए ही प्रकट होता है. इसीलिए यज्ञोपवीत धारण करने वाला इस बात के लिए तत्पर हो जाए कि प्रजापति मुझे जाने. जो इस बात को जानता है, वही प्रजापति के पश्चात जन्म लेने वाला समझा जाता है. (२४)

EN English Translation

The cloud that roars in the sky is Prajapati, it appears only to the people. That is why the person wearing yajnopavit should be ready to know Prajapati. The one who knows this is considered to be the one who is born after Prajapati. (24)

卐 HinduText AI