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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 1 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 1 • मन्त्र 5

9.1.5

Mantra ID: 9.1.5

मधोः॒ कशा॑मजनयन्त दे॒वास्तस्या॒ गर्भो॑ अभवद्वि॒श्वरू॑पः । तं जा॒तं तरु॑णं पिपर्ति मा॒ता स जा॒तो विश्वा॒ भुव॑ना॒ वि च॑ष्टे ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.1.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवों ने मधुकशा को जन्म दिया. उस का गर्भ विश्वरूप हुआ. तरुण रूप में उत्पन्न हुए विश्वरूप का उस की माता मधुकशा ने भरणपोषण किया. विश्वरूप ने उत्पन्न होते ही सारे संसार को मोहित कर दिया. (५)

EN English Translation

The Devas gave birth to Madhukasha. His womb was worldly. Vishwaroop, who was born in a young form, was sued by his mother Madhukasha. Vishwaroop captivated the whole world as soon as it was born. (5)

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