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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 118 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 118 • ऋचा / मन्त्र 2

1.118.2

Mantra ID: 1.118.2

त्रि॒व॒न्धु॒रेण॑ त्रि॒वृता॒ रथे॑न त्रिच॒क्रेण॑ सु॒वृता या॑तम॒र्वाक् । पिन्व॑तं॒ गा जिन्व॑त॒मर्व॑तो नो व॒र्धय॑तमश्विना वी॒रम॒स्मे ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.118.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! तुम अपने त्रिबंधुर, तीन पहियों वाले, तीन लोकों में चलने वाले एवं शोभन गति वाले रथ द्वारा हमारे समीप आओ. हमारी गायों को दुधारू, हमारे घोड़ों को प्रसन्न एवं हमारे पुत्रादि को वृद्धियुक्त करो. (२)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! Come to us by your tribandhur, three-wheeled, three-loka-treading, and a beautifully moving chariot. Make our cows milch, our horses happy, and our sons grow. (2)

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