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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 118 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 118 • ऋचा / मन्त्र 8

1.118.8

Mantra ID: 1.118.8

यु॒वं धे॒नुं श॒यवे॑ नाधि॒तायापि॑न्वतमश्विना पू॒र्व्याय॑ । अमु॑ञ्चतं॒ वर्ति॑का॒मंह॑सो॒ निः प्रति॒ जङ्घां॑ वि॒श्पला॑या अधत्तम् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.118.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्चिनीकुमारो! तुमने अपने प्राचीन याचक शंयु ऋषि के लिए गाय को दुधारू किया था. तुमने वर्तिका को पाप से बचाया एवं विश्पला को दूसरी जंघा लगाई थी. (८)

EN English Translation

O aschinikumaro! You had milched the cow for your ancient yachak shanyu sage. You saved Vartika from sin and gave Vishpala another thigh. (8)

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