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1.144.3
युयू॑षतः॒ सव॑यसा॒ तदिद्वपुः॑ समा॒नमर्थं॑ वि॒तरि॑त्रता मि॒थः । आदीं॒ भगो॒ न हव्यः॒ सम॒स्मदा वोळ्हु॒र्न र॒श्मीन्सम॑यंस्त॒ सार॑थिः ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 1.144.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
समान अवस्था वाले एवं समान प्रयोजन की सिद्धि के लिए एक-दूसरे की बहुत कुछ सहायता करते हुए होता एवं अध्वर्यु अग्नि के शरीर में अपना-अपना यश मिलाते हैं. जिस प्रकार सूर्य अपनी किरणों को समेटते हैं एवं सारथि घोड़ों की लगाम पकड़ता है, उसी प्रकार अग्नि हमारे द्वारा डाली गई घृतधाराओं को स्वीकार करते हैं. (३)
EN English Translation
Those with the same state and the same purpose are very helpful to each other and the adhwaryu adds their glory to the body of the fire. Just as the sun compels its rays and holds the reins of the charioteer horses, so the fire accepts the crooks we cast. (3)