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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 171 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 171 • ऋचा / मन्त्र 3

1.171.3

Mantra ID: 1.171.3

स्तु॒तासो॑ नो म॒रुतो॑ मृळयन्तू॒त स्तु॒तो म॒घवा॒ शम्भ॑विष्ठः । ऊ॒र्ध्वा नः॑ सन्तु को॒म्या वना॒न्यहा॑नि॒ विश्वा॑ मरुतो जिगी॒षा ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.171.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! स्तुति सुनकर हमें सुखी करो. सर्वाधिक सुखदाता इंद्र हमें प्रसन्न करें. हे मरुतो! हम जितने दिन जीवित रहें, वे दिन सबसे अधिक उत्तम, चाहने योग्य एवं भोगपूर्ण हों. (३)

EN English Translation

O Maruto! Make us happy by listening to praise. May indra, the most happy, please us. O Maruto! The days we live, the best, the most enjoyable, are the days we have. (3)

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