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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 171 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 171 • ऋचा / मन्त्र 5

1.171.5

Mantra ID: 1.171.5

येन॒ माना॑सश्चि॒तय॑न्त उ॒स्रा व्यु॑ष्टिषु॒ शव॑सा॒ शश्व॑तीनाम् । स नो॑ म॒रुद्भि॑र्वृषभ॒ श्रवो॑ धा उ॒ग्र उ॒ग्रेभिः॒ स्थवि॑रः सहो॒दाः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.171.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुझ बलशाली के अनुग्रह से अभिमानपूर्ण किरणें नित्य प्रति उषाकाल होने पर प्राणियों को जगा देती हैं. हे कामवर्षी, उग्र, शत्रुओं को हराने वाले बल के दाता एवं पुरातन इंद्र! तुम परम बलशाली मरुतों के साथ मिलकर हमें अन्न दो. (५)

EN English Translation

O Indra! With the grace of your mighty, proud rays awaken beings when they are in constant harmony. O Celestial, the furious, the giver of force to defeat enemies and the ancient Indra! You, together with the most mighty maruts, give us food. (5)

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