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1.183.4
मा वां॒ वृको॒ मा वृ॒कीरा द॑धर्षी॒न्मा परि॑ वर्क्तमु॒त माति॑ धक्तम् । अ॒यं वां॑ भा॒गो निहि॑त इ॒यं गीर्दस्रा॑वि॒मे वां॑ नि॒धयो॒ मधू॑नाम् ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 1.183.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे शत्रुनाशक अश्विनीकुमारो! तुम्हारी कृपा से हिंसक मादा एवं नर पशु मुझे दुःखी न करें. तुम अपना धनादि दूसरे किसी को मत देना. यह तुम्हारी स्तुति है, यह हव्य का भाग है और यह सोमरस का पात्र है. (४)
EN English Translation
O enemy-destroying Ashwinikumaro! By your grace, do not let violent females and male animals grieve me. Don't give your money to anyone else. This is your praise, it is part of the universe and it is the character of the Somras. (4)