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1.71.7
अ॒ग्निं विश्वा॑ अ॒भि पृक्षः॑ सचन्ते समु॒द्रं न स्र॒वतः॑ स॒प्त य॒ह्वीः । न जा॒मिभि॒र्वि चि॑किते॒ वयो॑ नो वि॒दा दे॒वेषु॒ प्रम॑तिं चिकि॒त्वान् ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 1.71.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जिस प्रकार विशाल सात सरिताएं सागर के पास पहुंचती हैं, उसी प्रकार समस्त हव्य अन्न अग्नि को प्राप्त होते हैं. हमारे पास इतना कम अन्न है कि हमारी जाति वाले उसका भाग नहीं पाते. इसलिए तुम देवों में मननीय धन को जानकर हमें प्राप्त कराओ. (७)
EN English Translation
Just as the huge seven streams reach the sea, so all the havya annas are received by the agni. We have so little grain that our people of our jati do not get a share of it. So you know the wealth that is contemplative in the gods and get us. (7)