Popular:
ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 96 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 96 • ऋचा / मन्त्र 2

1.96.2

Mantra ID: 1.96.2

स पूर्व॑या नि॒विदा॑ क॒व्यता॒योरि॒माः प्र॒जा अ॑जनय॒न्मनू॑नाम् । वि॒वस्व॑ता॒ चक्ष॑सा॒ द्याम॒पश्च॑ दे॒वा अ॒ग्निं धा॑रयन्द्रविणो॒दाम् ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 1.96.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि ने आयु की पूर्वकाल कृत एवं गुणनिष्ठ स्तुति को सुनकर इस मानवी प्रजा को उत्पन्न किया है एवं आच्छादक तेज के आकाश को व्याप्त किया है. ऋत्विजों ने धनदाता अग्नि को धारण किया है. (२)

EN English Translation

By listening to the predestined and meritorious praise of the age, agni has created this human being and has pervaded the sky of the covered glory. The ritwijs have held on to the money-giving agni. (2)

卐 HinduText AI