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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 101 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 101 • ऋचा / मन्त्र 10

10.101.10

Mantra ID: 10.101.10

आ तू षि॑ञ्च॒ हरि॑मीं॒ द्रोरु॒पस्थे॒ वाशी॑भिस्तक्षताश्म॒न्मयी॑भिः । परि॑ ष्वजध्वं॒ दश॑ क॒क्ष्या॑भिरु॒भे धुरौ॒ प्रति॒ वह्निं॑ युनक्त ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.101.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अध्वर्युजनो! तुम काठ के बरतन में रखे हुए हरे रंग के सोमरस को सींचो. पत्थर की टंकियों से यह पात्र बनाओ. दस उंगलियां लपेटकर इस पात्र को पकड़ो तथा रथ के दोनों धुरों में बैल जोड़ो (१०)

EN English Translation

O adhwaryujano! You irrigate the green somras kept in the wooden pot. Make this container from stone tanks. Hold this vessel with ten fingers wrapped and add the bull to both the axles of the chariot (10)

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