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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 103 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 103 • ऋचा / मन्त्र 5

10.103.5

Mantra ID: 10.103.5

ब॒ल॒वि॒ज्ञा॒यः स्थवि॑रः॒ प्रवी॑रः॒ सह॑स्वान्वा॒जी सह॑मान उ॒ग्रः । अ॒भिवी॑रो अ॒भिस॑त्वा सहो॒जा जैत्र॑मिन्द्र॒ रथ॒मा ति॑ष्ठ गो॒वित् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.103.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सब प्राणियों का बल जानने वाले, महान्‌ उत्तम वीर, सामर्थ्यशाली, शीघ्र गति वाले, शत्रुपराभवकारी, उग्र, शक्तिशाली वीर पुत्रों वाले, बल प्राप्तकर्ता एवं शक्ति से उत्पन्न गायों को प्राप्त करने वाले इंद्र! तुम विजय प्राप्त करने वाले रथ पर चढ़ो. (५)

EN English Translation

O Indra, who knows the strength of all beings, the great heroes, the mighty, the fast-paced, the enemy-losers, the fierce, the mighty, the mighty, the brave sons, the recipient of strength, and the receiving of the cows born of power! You climb the conquering chariot. (5)

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