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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 104 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 104 • ऋचा / मन्त्र 3

10.104.3

Mantra ID: 10.104.3

प्रोग्रां पी॒तिं वृष्ण॑ इयर्मि स॒त्यां प्र॒यै सु॒तस्य॑ हर्यश्व॒ तुभ्य॑म् । इन्द्र॒ धेना॑भिरि॒ह मा॑दयस्व धी॒भिर्विश्वा॑भिः॒ शच्या॑ गृणा॒नः ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.104.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे हरि नामक घोड़ों वाले एवं वर्षाकर्ता इंद्र! तुम्हारे पीने के लिए निचोड़े गए सोम को यज्ञ में तुम्हारे आने का निश्चय जानकर तुम्हें भेंट करता हूं. तुम शक्ति से युक्त एवं प्रशंसित होकर इस यज्ञ में समस्त स्तुतियों एवं कर्मो से प्रसन्न बनो. (३)

EN English Translation

O Indra, the horseman and the rainer, named Hari! Knowing your determination to come to the yagna, I offer you the som squeezed for your drink. Be pleased with all the praises and deeds in this yajna by being empowered and admired. (3)

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