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10.109.3
हस्ते॑नै॒व ग्रा॒ह्य॑ आ॒धिर॑स्या ब्रह्मजा॒येयमिति॒ चेदवो॑चन् । न दू॒ताय॑ प्र॒ह्ये॑ तस्थ ए॒षा तथा॑ रा॒ष्ट्रं गु॑पि॒तं क्ष॒त्रिय॑स्य ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.109.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
उन लोगों ने बृहस्पति से कहा-“यह तुम्हारी विवाहिता पत्नी है. तुम्हें इसका शरीर हाथ से ग्रहण करना चाहिए. इन्हें खोजने को दूत गया था, उसके प्रति इसने समर्पण नहीं किया था. यह शक्तिशाली राजा के राष्ट्र के समान सुरक्षित है. (३)
EN English Translation
They said to Jupiter, "This is your married wife. You should receive its body by hand. The messenger had gone to find them, to him he did not surrender. It is as safe as the nation of the mighty king. (3)