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10.110.1
समि॑द्धो अ॒द्य मनु॑षो दुरो॒णे दे॒वो दे॒वान्य॑जसि जातवेदः । आ च॒ वह॑ मित्रमहश्चिकि॒त्वान्त्वं दू॒तः क॒विर॑सि॒ प्रचे॑ताः ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.110.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे जातवेद अग्नि! तुम आज मानवों के घर में प्रज्वलित होकर इंद्रादि देवों की पूजा करते हो. स्तोता मित्रों की पूजा करने वाले अग्नि! तुम स्तोताओं द्वारा की हुई स्तुतियां जानते हुए देवों को बुलाओ. तुम बुद्धिमान् एवं कार्यकुशल हो. (१)
EN English Translation
O Jativeda Agni! Today you are ignited in the house of human beings and worship the Indradi devas. Fire to worship the stota friends! You call the gods knowing the praises made by the Psalms. You are intelligent and efficient. (1)