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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 110 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 110 • ऋचा / मन्त्र 5

10.110.5

Mantra ID: 10.110.5

व्यच॑स्वतीरुर्वि॒या वि श्र॑यन्तां॒ पति॑भ्यो॒ न जन॑यः॒ शुम्भ॑मानाः । देवी॑र्द्वारो बृहतीर्विश्वमिन्वा दे॒वेभ्यो॑ भवत सुप्राय॒णाः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.110.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सुंदर पत्नियां अच्छे कपड़े पहनती हैं एवं पतियों के सामने जिस प्रकार अपना शरीर प्रकट करती हैं, उसी प्रकार यज्ञशाला के सभी द्वारों पर देवियां प्रकट हों. हे द्वारदेवियो! द्वार इतने खुल जावें कि देवगण उन में होकर सरलता से जा सकें. (५)

EN English Translation

Beautiful wives dress well and just as they reveal their bodies to the husbands, so the goddesses appear at all the gates of the yajnashala. O gate, ladies! Let the doors be open so that the devas can easily go through them. (5)

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