Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 112 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 112 • ऋचा / मन्त्र 9

10.112.9

Mantra ID: 10.112.9

नि षु सी॑द गणपते ग॒णेषु॒ त्वामा॑हु॒र्विप्र॑तमं कवी॒नाम् । न ऋ॒ते त्वत्क्रि॑यते॒ किं च॒नारे म॒हाम॒र्कं म॑घवञ्चि॒त्रम॑र्च ॥ (९)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.112.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे गणों के स्वामी इंद्र! तुम स्तोताओं के समूहों में बैठो. तुम कर्मकर्ता व्यक्तियों में सर्वाधिक कुशल हो, पास या दूर, तुम्हारे बिना कोई भी यज्ञकार्य नहीं होता है. हे धन स्वामी इंद्र! हमारे स्तुतिमंत्रों को विस्तृत और विचित्र बनाओ. (९)

EN English Translation

O Lord indra of the ganas! You sit in groups of hymns. You are the most skilled among the workers, near or far away, without you there is no sacrificial work. O Lord of Wealth Indra! Make our hymns elaborate and bizarre. (9)

卐 HinduText AI