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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 118 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 118 • ऋचा / मन्त्र 6

10.118.6

Mantra ID: 10.118.6

तं म॑र्ता॒ अम॑र्त्यं घृ॒तेना॒ग्निं स॑पर्यत । अदा॑भ्यं गृ॒हप॑तिम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.118.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मनुष्यो! घृत द्वारा मरणरहित, अपराजेय एवं गृहपति अग्नि की सेवा करो. (६)

EN English Translation

O men! Serve the agni without death, unbeatable and homemaker by the abomination. (6)

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