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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 121 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 121 • ऋचा / मन्त्र 1

10.121.1

Mantra ID: 10.121.1

हि॒र॒ण्य॒ग॒र्भः सम॑वर्त॒ताग्रे॑ भू॒तस्य॑ जा॒तः पति॒रेक॑ आसीत् । स दा॑धार पृथि॒वीं द्यामु॒तेमां कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.121.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

परमात्मा से सबसे पहले प्रजापति उत्पन्न हुए. वे उत्पन्न होते ही सब जगत्‌ के स्वामी बने. उन्होंने धरती एवं इस द्यौ को धारण किया. हम पुरोडाश आदि के द्वारा दिव्य प्रजापति की सेवा करें. (१)

EN English Translation

The first prajapatis were born from god. As soon as they were born, they became masters of all the worlds. He held the earth and this thread. Let us serve the divine Prajapati through purodash etc. (1)

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