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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 121 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 121 • ऋचा / मन्त्र 8

10.121.8

Mantra ID: 10.121.8

यश्चि॒दापो॑ महि॒ना प॒र्यप॑श्य॒द्दक्षं॒ दधा॑ना ज॒नय॑न्तीर्य॒ज्ञम् । यो दे॒वेष्वधि॑ दे॒व एक॒ आसी॒त्कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.121.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्रजापति को धारण करने वाले एवं यज्ञ को उत्पन्न करने वाले जल को प्रजापति ने अपने महत्त्व से देखा. जो सभी देवों के मध्य एकमात्र देव हुए, हम उन्हीं प्रजापति की हव्य द्वारा सेवा करें. (८)

EN English Translation

Prajapati saw the water that holds the prajapati and produces the yajna with his importance. Those who were the only gods among all the gods, let us serve the same Prajapati through the word. (8)

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