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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 123 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 123 • ऋचा / मन्त्र 6

10.123.6

Mantra ID: 10.123.6

नाके॑ सुप॒र्णमुप॒ यत्पत॑न्तं हृ॒दा वेन॑न्तो अ॒भ्यच॑क्षत त्वा । हिर॑ण्यपक्षं॒ वरु॑णस्य दू॒तं य॒मस्य॒ योनौ॑ शकु॒नं भु॑र॒ण्युम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.123.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वेन! तुम सुनहरे पंखों वाले पक्षी के समान, स्वर्ग में उड़ने वाले, वरुण के दूत, विद्युत्‌- अग्नि के स्थान अंतरिक्ष में पक्षीरूप में वर्तमान एवं विश्व का भरण करने वाले हो. सब लोग हृदय में प्रेम रखते हुए तुम्हें देखते हैं. (६)

EN English Translation

Hey Wayne! You are like a bird with golden wings, flying in heaven, the messenger of Varuna, the present in the form of a bird in space instead of electric agni and the filling of the world. Everyone sees you with love in their hearts. (6)

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