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10.123.7
ऊ॒र्ध्वो ग॑न्ध॒र्वो अधि॒ नाके॑ अस्थात्प्र॒त्यङ्चि॒त्रा बिभ्र॑द॒स्यायु॑धानि । वसा॑नो॒ अत्कं॑ सुर॒भिं दृ॒शे कं स्व१॒॑र्ण नाम॑ जनत प्रि॒याणि॑ ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.123.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
वेन जल धारण करने वाले एवं स्वर्ग के ऊंचे स्थान में रहते हैं एवं अपने चारों ओर विचित्र आयुध धारण करते हैं. वे सूर्य के समान अपने सुंदररूप में चमकते हैं एवं सबके अनुकूल जलों को उत्पन्न करते हैं. (७)
EN English Translation
Wen are water-holding people and live in the high place of heaven and wear a strange armament around them. They shine in their beautiful form like the sun and produce water to suit everyone. (7)