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10.128.4
मह्यं॑ यजन्तु॒ मम॒ यानि॑ ह॒व्याकू॑तिः स॒त्या मन॑सो मे अस्तु । एनो॒ मा नि गां॑ कत॒मच्च॒नाहं विश्वे॑ देवासो॒ अधि॑ वोचता नः ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.128.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मेरे ऋत्विज् मेरे हव्य आदि का यजन मेरे कल्याण के लिए करें. मेरा मनोरथ पूर्ण हो. मैं किसी भी पाप को न करूं, सभी देव मुझे आशीर्वाद दें. (४)
EN English Translation
Please use my rituals for my welfare, etc. for my welfare. My mind is complete. I do not commit any sin, may all gods bless me. (4)