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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 13 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 13 • ऋचा / मन्त्र 3

10.13.3

Mantra ID: 10.13.3

पञ्च॑ प॒दानि॑ रु॒पो अन्व॑रोहं॒ चतु॑ष्पदी॒मन्वे॑मि व्र॒तेन॑ । अ॒क्षरे॑ण॒ प्रति॑ मिम ए॒तामृ॒तस्य॒ नाभा॒वधि॒ सं पु॑नामि ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.13.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे गाड़ियो! मैं तुम्हारे ऊपर यज्ञ के पांच उपकरणों को रखता हूं, नियमपूर्वक चार छंदों का प्रयोग करता हूं, ओम्‌ का उच्चारण करके यज्ञकार्य पूरा करता हूं एवं यज्ञ की नाभि पर सोमरस को शुद्ध करता हूं. (३)

EN English Translation

Oh, the cars! I place the five instruments of the yajna above you, use four verses regularly, complete the yajna by uttering om and purify the somras on the navel of the yajna. (3)

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