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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 137 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 137 • ऋचा / मन्त्र 4

10.137.4

Mantra ID: 10.137.4

आ त्वा॑गमं॒ शंता॑तिभि॒रथो॑ अरि॒ष्टता॑तिभिः । दक्षं॑ ते भ॒द्रमाभा॑र्षं॒ परा॒ यक्ष्मं॑ सुवामि ते ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.137.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमान! मैं तुम्हारे लिए सुखकारी एवं कष्टविनाशक रक्षासाधन लेकर आया हूं. मैंने तुम में कल्याणकारी शक्ति भरी है. मैं अब तुम्हारे रोग को दूर करता हूं. (४)

EN English Translation

O host! I have brought you a soothing and painful defense. I have instilled in you the welfare power. I'm going to cure your disease now. (4)

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