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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 145 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 145 • ऋचा / मन्त्र 5

10.145.5

Mantra ID: 10.145.5

अ॒हम॑स्मि॒ सह॑मा॒नाथ॒ त्वम॑सि सास॒हिः । उ॒भे सह॑स्वती भू॒त्वी स॒पत्नीं॑ मे सहावहै ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.145.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ओषधि! मैं तुम्हारी कृपा से अपनी सौत को पराजित करूंगी. इस प्रकार तुम भी पराजित करने वाली हो. हम और तुम दोनों शक्तिशालिनी बनकर सौत को शक्तिहीन करें. (५)

EN English Translation

O hermit! I will defeat my son-in-law by your grace. Thus you are also going to be defeated. Let us and you both become powerful and make Saut powerless. (5)

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